हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इमाम ज़माना के प्रतिनिधि और वली अम्र मुस्लेमीन जहान सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैन ख़ामेनई रिज़वानुल्लाह तआला अलैह की मज़लूमाना शहादत के पुर दर्द और ग़मग़ीन घटना पर आज़ बहिश्ते जहरा पार्क डी सी ऑफिस के नजदीक बड़गाम मे अंजुमन ए शरई शियान जम्मू कश्मीर के तत्वाधान एक दर्दभरी मजलिस तरहीम का आयोजन किया गया।
इस शोकलीय प्रोग्राम मे हज़ारो अकीदत मंदो ने हिस्सा लेकर सुप्रीम लीडर को श्रृद्धांजली अर्पित करते हुए अपने दुख और गम व्यक्त किया। मजलिस के दौरान माहोल रिक्कत आमीज दृश्य से भर उठी जब अंजुमने शरई से संबंधित जाकेरीन ने इंतहाई दर्द और सोज़ के साथ मरसिया खानी की। मरसियो ने माहोल को अघिक ग़मग़ीन बना दिया उपस्थित लोग नौहा और मातम करते रहे और अपने जज़्बात का इज़हार किया।
मजलिस को संबोधित करते हुए अंजुमन शरई के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम आग़ा हसन मूसवी सफ़वी ने पुर जोश, मदल्ल भाषण देते हुए कहा कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी खामेनई की अत्याचारपूर्ण शहादत केवल एक व्यक्ति का फ़ुक़दान नही बल्कि पूरी इस्लामी उम्मत और दुनिया के मजलूम इसानो के लिए बहुत बड़ी दुर्घटना है।
उन्होने कहा कि सुप्रीम लीडर ऐसे नेता थे जिन्होने अपनी पूरा जीवन इसलाम की रक्षा, मुसलमानो के सम्मान और मज़लूम राष्ट्र के अधिकारो की रक्षा के लिए समर्पित कर रखा था। उन्होने कहा कि सुप्रीम लीडर का जीवन दृढता, बुद्धिमत्ता और उपनिवेशवाद के खिलाफ जिद्दो जहद का स्पष्ठ उदाहरण था। उन्होने दशको तक वैश्विक उपनिवेशवाद और ज़ायोनी आक्रमणता के खिलाफ़ डट कर आवाज़ उठाई और मजलूम राष्ट्र के लिए आशा का दीपक बने रहे। उनकी शहादत वास्तव मे वैश्विक उपनिवेशवाद विशेष रूप से अमेरिका और इज़रायल की बोखलाहट और नैतिक पराजय का स्पष्ट सबूत है।
आगा सय्यद हसन मूसवी ने अपने संबोधन मे कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि ज़ुल्म के किला हमेशा शहीदो के खून से लरज़ उठते है। उन्होने कहा कि सुप्रीम लीडर का पवित्र खून व्यर्थ नही जाएगा बल्कि इंशाल्लाह यह अमेरिका और इज़्रायल की ज़ालेमाना पालिसीयो के पतन और अंत की प्रस्तावना होगी। उन्होने चेताया कि अगर शक्ति के नशे मे चोर शक्तिया यह समझती है कि वह एक अज़ीम नेता को निशाना बनाकर प्रतिरोध की आवाज़ को खामोश कर देंगे तो यह उनकी सबसे बड़ी गलत समझ है।
उन्होने आगे कहा कि सुप्रीम लीडर की शहादत इस्लामी उम्मत के इरादे को कमज़ोर नही बल्कि अधिक मज़बूत करेगी। जिस प्रकार कर्बला के शहीदो के रक्त ने इतिहास का धारा बदल दिया था, उसी प्रकार यह अन्याय पूर्ण शहादत पूरी इस्लामी उम्मत के अंदर जागरूकता, प्रतिरोध और एकता की नई आत्मा फ़ूकेगी। उन्होने स्प्ष्ठ किया कि क्षेत्र मे ज़ुल्म और आक्रमणता मे लिप्त तत्वो के लिए अब कोई सुरक्षित स्थान बाकी नही रहेगा क्योकि मजलूम राष्ट्र अपने अधिकारो के लिए पहले से कही अधिक मज़बूती के साथ खड़ी होगी। संगठन के अध्यक्ष ने सुप्रीम लीडर की सबसे बड़ी नसीहत इस्लामी उम्मत के बीच एकता, आज़ादी की रक्षा और धरती की संप्रभुता की रक्षा थी।
उन्होने कहा आज इस घटना के बाद सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यही है कि इस्लामी उम्मत तफरक़ा और इंतेशार से बचते हुए एकता और एकजुटता व्यक्त करे और ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ साझ़ा आवाज़ उठाए। उन्होने इस अवसर पर कहा कि संगठन इस बड़ी घटना पर गहरे ग़म और गुस्सा व्यक्त करते हुए शहीद सुप्रीम लीडर को श्रृद्धंजली अर्पित करता है और उस वाचा का नवीनीकरण करता है कि उनके विचार, उनके क्रांति कारी मिशन और उनकी दृढ़ता के मार्ग को ज़िदा रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगा।
उन्होने जम्मू कश्मीर की जनता और पूरी इस्लामी उम्मत से अपील की है कि वह जागरूकता, एकता और दृढ़ता के साथ ज़ुल्म के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाए, मजलिस के समापन पर अल्लाह की बारगाह मे विशेष दुआ की गई और अल्लाह तआला से शहीद सुप्रीम लीडर को उनके पूर्वज आइम्मा ए ताहेरीन के साथ उच्च पद प्रदान करे, इस्लामी उम्मत को सब्र और बसीरत अता करे और उम्मत को उनके मिशन को पूरा करने की तौफ़ीक़ दे।








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